काल सर्प दोष से पीड़ित जातक को निम्नलिखित परेशानियों से जूझना पड़ता है।
१। आजीविका प्राप्ति में बाधा
२। वैवाहिक जीवन में कलह
३। धन प्राप्ति में बाधा
४। मानसिक तनाव व अशांति
५। काल सर्प योग के कुंडली में अगर रहू या केतु का शनि, मंगल या सूर्य से कोई योग बनता है तो जातक का जीवन संघर्षो से भरा रहता है।
अधिक अनिष्टकारी समय
काल सर्प दोष का अधिक कुप्रभाव प्रायः निम्न अवधियो में होता है।
१। रहू के अंतर तथा प्रत्यंतर दशा में
२। शनि के अन्तर दशा में
३। सूर्य के अन्तर दशा में।
४। मंगल के अन्तर दशा में
५। शनी के साढ़े शाती में
६। जीवन के मध्यायु में
७। गोचर कुंडली में जब जब काल सर्प योग बनता है तब तब कुप्रभाव बढ़ जाता है।
Saturday, April 3, 2010
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very nic & useful article..........
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