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Wednesday, November 25, 2009

ज्योतिष एक विज्ञानं


ज्योतिष एक विज्ञान
जिस शास्त्र [विज्ञान ] के पास पृथ्वी की उत्पत्ति का भी डाटा मौजूद है ,उसे यूँ ही अंधविस्वास नही कहकर नाकारा जा सकता है । आज का आधुनिक विज्ञान भी ,अपनी नवीनतम तकनीको से पृथ्वी की उम्र [लगभग २ अरब वर्ष ] की व्ही पुष्टि कर रहे है ,जो की ज्योतिष विज्ञान बताता है ।
इस तथ्य को जान लेने के बाद हम विचार करते है की किन कारणों से ज्योतिष विज्ञान को अंध विश्वास की श्रेणी में रखा जाने लगा । तो सब से पहले ज्योतिष का अध् कचरा ज्ञान रखने वाले महानुभाव लोग नजर आते है । जो की ज्योतिष को अपने फायदे के लिए एक जादूगरी या बाजीगरी की तरह पेश करते है।
जबकि ज्योतिष एक विशुध्तम विज्ञान है , और इस के द्वारा तभी किसी को कुछ लाभ पहुचाया जासकता है जबकि ज्योतिर्विद जातक से ठीक एक मनोवैज्ञानिक की तरह बात करे । तब ही वह सही समस्या तक पहुच पायेगा । अन्यथा कोई भी परिणाम नही निकलेगा । सिर्फ़ धोके धड़ी का व्यपार बढ़ेगा । अब अन्य कारण, जो ज्योतिष विज्ञान को हानि पहुँचा रहे है , उन पर भी गौर करते है ।
जैसे ,किसी भी विज्ञान में उसकी एक अपनी तकनिकी भाषा होती है ,जिसका भाव व अर्थ तो समझा जा सकता है ,किंतु उसका अन्य भाषा में वैसा ही भावार्थ के साथ अनुवाद हो सके ,ऐसा जरुरी नही है । उदाहरण में , अंग्रेजी भाषा का प्लानेट शब्द संस्कृत के ग्रह शब्द के अर्थो के करीब होते हुए भी पूरी तरह से समानार्थक नही है ।
प्लेनेट शब्द का अर्थ सूर्य के इर्दगिर्द घुमने वाले विशेष आकर प्रकार व गुन लिए हुए आकाशीय पिंडो से है ,जबकि ग्रह शब्द का अर्थ ज्योतिष में उन आकाशीय तत्वों से है जिनका प्रभाव प्रथ्वी पर पड़ता है । अतः ग्रह की इस परिभाषा के अंतर्गत सूर्य भी ग्रह है ,चद्रमा भी ग्रह है व रहू केतु काटन बिन्दु भी ग्रह है । क्योंकि इन सब का प्रभाव हमारे ऊपर अर्थात पृथ्वी पर पड़ता है ।चन्द्रमा के कारण समंदर के ज्वार भंते को कोई नकार नही सकता । सूर्य के प्रभव से होते दिन रात बदलते मौसम को कोई भी नकार नही सकता । इसी प्रकार ज्योतिष की परिभाष के अन्तरगत आने वाले ग्रह कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य दिखलाते है । जबकि प्लानेट का असर हो जरुरी नहीं।
इस तथ्य से स्पष्ट है की भाषाई भ्रम भी ज्योतिष को हनी पंहुचा रहा है ।
कई बार लोग कहते है की ज्योतिषी ने भिविष्यवानीकरी थी सब ग़लत साबित हुई है। ये सब बकवास है । ये कोई विज्ञानं नहीं है ।
इसके उत्तर में मेरा एक प्रश्न है, मौसम विभाग कितनी ही बार मौसम की भिविष्यवानी करता है जो की ग़लत साबित होती है ,फिर भी मौसम विभाग का विज्ञानं विज्ञानं ही है ,क्यो ?
कई बार डॉक्टर साहब मरीज के लक्चन देखकर ग़लत बीमारी का अंदाजा लगा लेते है । जबकि मरीज को कोई और बीमारी होती है ,तब भी आधुनिक चिकित्सा विज्ञानं विज्ञानं ही है , क्यो ?
जवाब यही है की जिस तरह मौसम विभाग या डॉक्टर विश्लेषण करने में गलती कर सकते है,उसी प्रकार एक ज्योतिर्विद भी गलती कर सकता है .या आप ऐसे ज्योतिषी के पास गए हो जिसे ठीक से ज्योतिष का ज्ञान ही न हो ।
अतः सिर्फ़ इतनी सी बात के लिए ज्योतिष अन्धविश्वास हो जाए ,विज्ञानं न रह जाए ,ऐसा नहीं होसकता ।
दूसरे एक तथ्य यह भी हैं की किसी भी विज्ञानं में समय के साथ नई खोज होती रहती है और नियम बनते बिगड़ते रहते है । चूँकि ज्योतिष भी विज्ञानं है अतः यह भी वाद अपवाद से अछूता नहीं है।

जिसप्रकार आधुनिक चिकित्षा विज्ञानं इतनी तरक्की करलेने के बाद भी ,मनुष्य के पेट में उपस्थित तिल्ली का क्या उपयोग है ,यह नही जान पाया है ,उसीप्रकार ज्योतिष के सामने अभी भी अनसुलझे प्रश्न बाकी है ।
मेरे इस तथ्य को उजागर करने का तातपर्य यही है की ,कोई भी विज्ञानं कितनी भी तरक्की करले ,उसके सामने कुछ न कुछ अनसुलझे रहस्य रहते ही है । और यही रहस्य किसी भी विज्ञानं की तरक्की का कारण बनते है ।

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